Bharat vs India: भारत नाम पर क्यों छिड़ी सियासत?

केंद्र सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र से पहले अब Bharat vs India  पर बवाल शुरू हो गया है। भारत को भारत कहां जाए हिंदुस्तान कहा जाए या फिर इंडिया, इस पर देशभर में  बहस तेजी से बढ़ रही है,  इस बहस की असली वजह  5 सितंबर 2023 को जी-20 के निमंत्रण कार्ड पर प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा था।  जिसके वायरल होने के बाद से ही भारत नाम पर विरोध शुरू हो गया है और देश की राजनीति को एक और मुद्दा मिल गया।

कैसे शुरू हुई Bharat vs India की बहस?

मंगलवार को जी-20 का एक निमंत्रण पत्र सामने आया, जिसमें जी-20 के रात्रिभोज का इनविटेशन कार्ड में राष्ट्रपति को प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा गया, जिसके बाद यह मामला गरमा गया। कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने तुरंत इस निमंत्रण पत्र को पकड़ा और कहा कि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को बदल दिया गया है, और प्रेसिडेंट ऑफ भारत का इस्तेमाल किया गया है, यानी इंडिया शब्द को हटा दिया गया है।

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जयराम रमेश के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बने 28 जनों के गठबंधन इंडिया (Indian National Developmental Inclusive Alliance) ने भी इस विषय पर बोलना शुरू कर दिया, कि क्या अब इंडिया की जगह भारत ही लिखा जाएगा?  इस बात पर बहस जोरो से पकड़ी, क्योंकि जी20 के बाद संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया है जिसमें देश का आधिकारिक नाम इंडिया से बदलकर भारत करने से जुड़ा प्रस्ताव लाया जाएगा।

देश की राजनीतिक घटनाक्रमों से अंदाजा लगाया जा रहा है ताकि इंडिया के नाम पर भारत के लिए सरकार कुछ करने वाली है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को लेकर दी गई जिस परिभाषा में इंडिया दैट इज भारत यानी इंडिया अर्थात भारत के जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, उसमें से सरकार इंडिया शब्द को निकालकर सिर्फ भारत शब्द को ही रहने देने पर विचार कर रही है। 

भारत नाम पर बीजेपी का तर्क

Bharat vs India  की बहस पर बीजेपी का यह तर्क है कि भारत लिखा जाना गुलामी मानसिकता पर गहरी चोट है, पूर्व क्रिकेटर सहवाग ने तो यह भी कह दिया कि टीम इंडिया को वर्ल्ड कप में टीम भारत के नाम से खेलना चाहिए इस विवाद से कुछ दिन पहले ही आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा था कि देश के लिए इंडिया की जगह भारत शब्द का प्रयोग होना चाहिए।

उसके बाद क्रिकेट के प्रेजेंट सुनील गावस्कर ने भी इस विवाद पर अपने प्रक्रिया दी उन्होंने कहा कि अगर बीसीसीआई फैसला लेती है और सरकार के स्तर पर इस पर हरी झंडी मिलती है तो टीम को देश के मूल नाम भारत से बुलाने में कोई आपत्ति नहीं है।

Bharat vs India पर क्या बोले विपक्षी नेता?

निमंत्रण पत्र के सामने आने के बाद से ही विपक्ष हमलावर हो गया है और इंडिया गठबंधन के नेताओं का दावा है कि इंडिया या भारत वाली बहस के पीछे बीजेपी का डर है आइए जानते हैं कि किस विपक्षी नेता ने क्या कहा?

  • ममता बनर्जी– उन्होंने कहां की आज उन्होंने इंडिया का नाम बदल दिया, जी20 शिखर सम्मेलन के रात्रि भोज के निमंत्रण कार्ड में भारत का उल्लेख किया गया है। अंग्रेजी में हम इंडिया और इंडियन कांस्टिट्यूशन और हिंदी में हम भारत और भारत का संविधान कहते हैं इस में नया क्या है?  लेकिन इंडिया नाम से दुनिया वाकिफ है अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्हें देश का नाम बदलना पड़ा?
  •  तमिलनाडु के सीएम और डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा- फासीवादी बीजेपी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए विपक्षी दलों ने एकजुट होकर गठबंधन को इंडिया नाम दिया लेकिन अब बीजेपी इंडिया को भारत में बदलना चाहती है बीजेपी ने भारत में बदलाव का वादा किया था लेकिन 9 साल के बाद सिर्फ बंदर नाम ही मिला है।

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  •  अधीर रंजन चौधरी ने कहा- हिंदू नाम भी विदेशों में दिया है मुझे लगता है कि पीएम खुद इंडिया नाम से डरते हैं जिस दिन से इंडिया नाम का गठबंधन बना है उसी दिन से पीएम मोदी की इंडिया नाम के प्रति नफरत बढ़ गई है अगर वह अंग्रेजों के इतने ही खिलाफ है तो उन्हें राष्ट्रपति भवन जो कि वायसराय का घर था का त्याग कर देना चाहिए।
  •  अरविंद केजरीवाल ने कहाअगर कुछ पार्टियों का गठबंधन इंडिया बन गया है तो क्या वह देश का नाम बदल देंगे? देश 140 करोड़ लोगों का है किसी पार्टी का नहीं,मान लीजिए कि अगर इंडिया गठबंधन अपना नाम भारत रखता है तो क्या वह भारत का नाम बदलकर बीजेपी करेंगे? यह कैसा मजाक है? बीजेपी को लग रहा है कि उनके वोटों की संख्या कम हो जाएगी इसलिए भारत का नाम बदल देना चाहिए। 

भारत नाम बदलने को पहले भी उठी है मांगे

 उत्तर प्रदेश में साल 2004 के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे, विधानसभा में एक प्रस्ताव पास हुआ मांग की गई थी कि संविधान में इंडिया दैट इज भारत को भारत दैट इज इंडिया कर देना चाहिए।

 इसके बाद 2012 में कांग्रेस के सांसद रहे संता राम नायक राज्यसभा में बिल लाए मांग की थी कि संविधान की प्रस्तावना में अनुच्छेद एक में और संविधान में जहां-जहां इंडिया शब्द का उपयोग हुआ हो उसे बदलकर भारत कर दिया जाना चाहिए।

 इसके बाद 2014 में योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया था इसमें संविधान में इंडिया शब्द की जगह हिंदुस्तान शब्द की मांग की गई थी जिसमें देश के प्राथमिक नाम के रूप में भारत का प्रस्ताव किया गया था।

भारत नाम की मांग सदन में ही नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट तक में उठ चुकी है बात करें मार्च 2016 की तो इंडिया नाम हटाकर भारत करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

 2016 में जब चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस यूयू ललित ने याचिकाकर्ता से कहा था कि भारत कहिए या इंडिया कहिए जो मन में है कहिए अगर आपका मन भारत कहने का है तो कहिए अगर कोई इंडिया कहता है तो कहने दीजिए।

 2020 में चीफ जस्टिस एस ए बोबडे  ने कहा था कि संविधान मैं भारत और इंडिया दोनों नाम दिए गए हैं।

 इस लिहाज से यह चर्चा अभी कि नहीं पुरानी है हालांकि 66 जरूर नहीं है गौर करने की बात है कि नाम बदलने के मुद्दे पर अब तक सरकार की तरफ से किसी भी तरह का कोई जवाब नहीं आया लेकिन जरूर साफ हो गया है कि भारत और इंडिया दोनों नाम से तो देश का दशक से ज्यादा से सविधान मुताबिक जाना जा रहा है वहां भारत और इंडिया के बीच अब खेलने बैठने लगे।

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