Chandrayaan 3 :अब शुरू हुआ मुश्किल का दौर, 12 दिन हो होंगे अहम

Chandrayaan 3: Indian Space Research Organisation ISRO द्वारा 14 जुलाई 2023 को chandrayaan-3 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। Chandrayaan-3 पहले पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश लिया और अब वह चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा है लेकिन आने वाले 12 दिन chandrayaan-3 मिशन के लिए बहुत ही अहम साबित होने वाले हैं।  chandrayaan-3 को 17 अगस्त को जब 100 किमी * 100 किमी की गोलाकार कक्षा में दाखिल कराया जाएगा उस समय नासा और कोरियाई स्पेस एजेंसी के और वेटर टकराव डालना भी अहम होगा।  तो आइए जानते हैं चंद्रयान 3 मिशन के लिए इन 12 दिनों की अहमियत।

 

Chandrayaan 3 मिशन के 12 दिन होंगे मुश्किल भरे

चंद्रयान 3 मिशन ने अभी तक के अपने सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है लेकिन अब इस मिशन के कठिन और जटिल परीक्षा की शुरुआत हो चुकी है, अगले कुछ दिनों में chandrayaan-3 मिशन अपने कठिन पड़ाव में प्रवेश करने वाला है अगले 12 दिन इस मिशन की कामयाबी के लिए मुश्किल भरे साबित होंगे।  चंद्रमा की कक्षा में दाखिल हो चुके  chandrayaan-3  14 अगस्त को चांद की सतह से अपनी दूरी को कम करना प्रारंभ कर देगा।  इस समय chandrayaan-3 चंद्रमा की कक्षा में 174 * 1437 कि मी के दायरे में है बात करें 9 अगस्त की तो चंद्रमा की सतह से chandrayaan-3 की अधिकतम दूरी 43100 13 किलोमीटर से घटाकर 437 किलोमीटर की गई थी।  17 अगस्त चौकी में 200 किमी की कक्षा में स्थापित किया जाना है।  17 अगस्त को ही मौजूदा प्रोपल्शन मॉड्यूल से चंद्रिका विक्रम लैंडर अलग होगा। 

Chandrayaan 3 Mission : मिशन अपने अगले पड़ाव पर

Chandrayaan-3  को कक्षा में ले जाना मुश्किल भरा

 17 अगस्त को chandrayaan-3 को 100 किमी * 100 किमी कक्षा में ले जाने से पूर्व एक बड़ी मुश्किल सामने होगी क्योंकि इस कक्षा में पहले से मौजूद नासा और कोरियाई स्पेस एजेंसी के और भीतर के साथ टकराव को टालना भी एक चुनौती है।  इसी कक्षा में chandrayaan-2 का और वेटर भी मौजूद है।  इसके अलावा चंद्रयान 1 और जापान का OUNA अब बेकार हो चुके हैं लेकिन चंद्रमा की कक्षा में मौजूद है। इन सभी से बचाकर chandrayaan-3के लैंडर को सफलतापूर्वक लैंड कराना होगा  क्योंकि  6:00 से 7:00 अंतरिक्ष यान पहले से ही इस कक्षा में मौजूद हैं।

इसरो के सामने बड़ी चुनौती

Chandrayaan 3  मिशन अपने अगले पड़ाव में प्रवेश करने वाला है, अगले पड़ाव में प्रवेश करने से पहले इसरो के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय है।  जिसमें इस रोक को अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ तालमेल रखने की जिम्मेदारी है सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल स्पेस ऑपरेशन मैनेजमेंट तीन लगातार हर रूलर ऑर्बिट लो रिंग के ऑपरेशन की बारीकी से निगरानी कर रही है। 

 इसरो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे इंटर एजेंसी स्पेस देवरी कोऑर्डिनेशन कमेटी के साथ भी संपर्क में है।  2019 में छोड़े गए chandrayaan-2 के ऑर्बिटल को अब तक तीन बार टकराव टालने के लिए रास्ता बदलने के मनोवर करने पड़े हैं  अब chandrayaan-3 को रूस के LUNA -25  से भी  सावधानी से रखना होगा जो 16 अगस्त को चंद्रमा की चौकी में * 100 किमी की कक्षा में पहुंचेगा 

LUNA -25 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 21 अगस्त में 23 अगस्त तक पहुंचने की उम्मीद है जब फिर चल रहा है 3 को 23 अगस्त या 24 अगस्त के बीच सॉफ्ट लैंडिंग कराना भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के लिए एक बड़ी चुनौती है। 

23-24 अगस्त को चांद पर उतरेगा Chandrayaan-3

Chandrayaan-3 की लैंडिंग की संभावनाएं 23 अगस्त को बताई जा रही है इससे पहले की यात्रा यान के लिए काफी कठिनाइयों से भरी है। बहुत कुछ यूनिसिस के दिखाता के रास्ते की तरह यह सब हमें 23 अगस्त तक चिंता में रहेगा।  जिसे भी यह देखना है उसने पहली बार सामुदायिक स्क्रीन, टच और मोबाइल फोन पर व्यापक रूप से लॉन्च की प्रक्रिया को बहुत विस्तार से देखा।  chandrayaan-3 1000 सेकंड की पहली  दिल की धड़कन  बढ़ाने वाला समय था सब कुछ उम्मीद के मुताबिक हुआ।  सरल कोर प्रज्वलित हो गया जो यान को कुछ कक्षा में ले गया।

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