Chandrayaan 3 : पूरा हुआ इम्तिहान, पास हुआ हिन्दुस्तान, जाने मिशन से जुड़े सवालों के जवाब

Chandrayaan 3 भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो द्वारा Chandrayaan 3 के विक्रम लैंडर को आज शाम 6:04 पर सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है। चंद्रयान तीन मिशन को चंद्रयान-2 का फॉलो अप मिशन बताया जा रहा है,Chandrayaan 3  के विक्रम लैंडर का मकसद है चंद्रयान को सॉफ्ट लैंडिंग करना। चंद्रयान-2 में विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हो गई थी जिसके बाद वह क्रश हो गया था 3 महीने बाद अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने इसका मालवा ढूंढा था और अब इसके 4 साल बाद फिर से इंडियन स्पेस एजेंसी इसरो Chandrayaan 3 के जरिए लैंडर और रोवर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश करने वाला है।

 

इसरो का Chandrayaan 3  मिशन आज शाम को चंद्रमा की सतह पर लैंड करने के लिए पूरी तरह से तैयार है चंद्रमा की सतह पर सॉफ्टलैंडिंग करते ही भारत चांद के दक्षिणी पोल पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा। चंद्रयान-3 का लैंडर रोवर चांद पर एक दिन काम करेगा इस प्रकार वह पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करेगा

इसरो के इस महत्वाकांक्षी मिशन से पूरे देश की उम्मीदें जुड़ी हुई है सभी अपने तरीके से भगवान से दुआ तथा प्रार्थना कर रहे हैं, देशभरमें आज इसका सीधा प्रसारण दिखाया जाएगा.

Chandrayaan 3: चांद पर जल्द बन सकेंगी कॉलोनी

लैंडिंग के लिए 23 अगस्त ही क्यों?

क्योंकि चांद पर 14 दिन तक दिन और अगले 14 दिन तक रात रहती है, इसरो द्वारा गणना की गई जिसके नतीजे निकले की 23 अगस्त से चांद पर दिन होगा यानी वह सूरज निकल रहा होगा .ऐसे में जब Chandrayaan 3 का विक्रम लैंडर लैंड करेगा तब दक्षिण ग्रुप पर सूरज की रोशनी उपलब्ध होगी अर्थात वहां सूर्योदय हो रहा होगा।Chandrayaan 3 का लैंडर और रोवर चांद के सतह पर उतरने के बाद अपने मिशन को अनजाम देने के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा ।23 अगस्त से 5 सितंबर के बीच दक्षिण दुर्ग पर धूप निकलेगी जिसकी मदद से Chandrayaan 3 का रोवर चार्ज हो सकेगा और Chandrayaan 3 मिशन को ठीकठाक आगे बढ़ता रहेगा।

विक्रम लैंडर के लैंडिंग के बाद क्याक्या होगा?

बुधवार किसान 6:04 पर विक्रम लैंडर चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंड करेगा,लैंडिंग बात से ही विक्रम लैंडर अपना काम शुरू कर देगा सॉफ्टलैंडिंग सफल रही तो लेंडर के जरिए 6 पहिए वाला प्रज्ञान रोवर बाहर आएगा और इसरो से कमांड मिलते ही चांद की सतह पर चलने लगेगा,वह 500 मीटर तक के इलाके में चहल कदमी कर पानी और वहां के वातावरण के बारे में इसरो को बताया। इस दौरान इसके पहिए चांद की मिट्टी और भारत के राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ और इसरो के लोगों की छाप छोड़ेंगे.

चंद्रयान 3 मिशन कितने दिन तक चलेगा?

इसरो के चंद्रायन-2 में लैंडर रोवर और ऑर्बिटल था लेकिन चंद्रयान-3 में ऑर्बिटल के बजाय स्वदेशी प्रोपल्शन मॉड्यूल है जरूरतपड़ने पर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटल की मदद ली जा सकती है प्रोपल्शन मॉड्यूल Chandrayaan 3  के लैंडर रोवर को चंद्रमा पर छोड़कर चांद की कक्षा में लगभग 100 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगता रहेगा.

इसरो को उम्मीद है कि लैंडर रोवर चंद्रमा पर एक दिन तक काम करेंगे यानी वह पृथ्वी का 14 दिन जहां तक प्रोपल्शन मॉड्यूल की बात है,यह चार से पांच सालों तक कम कर सकता है संभव है कि यह तीनों इससे ज्यादा भी कम कर सकेंगे.

विक्रम लैंडर

विक्रम लैंडर

विज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर का काम क्या रहेगा?

आपको बता दें कि Chandrayaan 3 मिशन के सफल होने के लिए इन दोनों की बहुत एहम भूमिका है क्योंकि विक्रम लैंडर में चार पर पैलोड्सलगे हैं पहले रंभा RAMBHA यह चाँद की सतहा पर सूरज से आने वाले प्लाज्मा कानों के घनत्व मात्रा और बदलाव की जांच करेगा,दूसरा ChaSTE यह चांद की सतह की गर्मी अर्थात तापमान की जांच करता रहेगा ,तीसरा है ILSA  भूकंपीय गतिविधियों कीजांच करेगा ,चौथ है लेजर रेट्रोरिफ़्रेल्टर एरे यह चांद के डायनामिक को समझने का प्रयास करेगा।

विक्रम लैंडर चांद के सतह पर रहकर विज्ञान रोवर से संदेश लगा जो की बेंगलुरू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क में भेजता रहेगा जोपढ़ने पर इसरो इस काम के लिए प्रोपल्शन मॉड्यूल और चंद्रयान-2 के और वेटर की मदद भी ले सकते हैं जहां तक बात रही प्रज्ञानरोवर की तो वह सिर्फ विक्रम से ही बात कर सकता है.

दक्षिण ध्रुव पर कहां लैंड करेगा चंद्रयान-3?

Chandrayaan 3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा यहां अभी तक कोई भी देश नहीं पहुंचा है यदि भारत का चंद्रयान-3 दक्षिण ध्रुव पर सॉफ्टलैंडिंग कर पाएगा तो वह भारत दुनिया में पहला देश बनेगा जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचा है

चंद्रयान को दक्षिण ध्रुव पर ही क्यों भेजा गया?

आपको बता दें कि चंद्रयान के पोलर रीजन दूसरे रीजन से काफी अलग है यहां पर कई हिस्सों में सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचतीऔर यहां का तापमान लगभग – 200 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक चला जाता है जब वैज्ञानिकों को यह पता चला तो उन्होंने अनुमानलगाया कि यहां पर बर्फ में अभी भी पानी मौजूद हो सकता है भारत के 2008 के चंद्रायन वन मिशन ने चंद्रमा की सतह पर पानी कीमौजूदगी को दर्शाया थाउसी की खोज चंद्रयान-3 मिशन के लिए अहम होगी.

चंद्रयान 3 मिशन पर कितने करोड रुपए खर्च हुए?

चंद्रयान 3 मिशन पर 615 करोड रुपए खर्च हुए हैं साल 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के असफल होने के बाद चंद्रयान-3 मिशन कीशुरुआत की गई इस 2021 में ही लॉन्च करने का प्लान था लेकिन कोविद महामारी की वजह से इसमें देरी हुई और आखिर में 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3 मिशन को लांच किया गया.

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