Ekadashi:क्यों करते है व्रत ,जाने व्रत के बारे में

Ekadashi : पुराण में ऐसा वर्णन है की Ekadashi के दिन उपवास रखने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं ,असीमित पुणे और सौभाग्य प्राप्तहोता है, उपवास का आधारभूत उद्देश्य भूखा रहना नहीं होता बल्कि भगवान गोविंद, श्री कृष्ण के प्रति अपने श्रद्धा और प्रेम बढ़ना होता है।

इस व्रत का मुख्य उद्देश्य है भगवान के प्रति अपनी भक्ति को उजागर करना ,Ekadashi उपवास करने का वास्तविक उद्देश्य देह कीआवश्यकताओं को कम करके,भगवान के कीर्तन में अपना समय व्यतीत करना है ।व्रत के दिनों में सर्वश्रेष्ठ कार्य है भगवान गोविंद की दिव्य लीलाओं का स्मरण करना तथा निरंतर उनके पवित्र नाम का श्रवण और कीर्तन करना।

Ekadashi की साधारण परिभाषा

Ekadashi शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का 11 दिन होता है.Ekadashi  के दिन कृष्ण भक्त अनाज, दालों तथा मटर आदि का निषेध कर सरल आहार ग्रहण करके कीर्तन,जप तथा अन्य आध्यात्मिक कार्य करते कृष्णा स्मरण को बढ़ाते हैं।

बाहरी और आंतरिक शुद्धिकरण

वैष्णव पंचांग के अनुसार Ekadashi तथा श्री भगवान एवं उनके भक्तों के आविर्भाव एवं तिरोभाव के दिनों में अनेक उपवास है। यह सभी दिन एवं उपवास शरीर की चर्बी को कम करने के लिए है,ताकि कोई आवश्यकता से अधिक सोए और निष्क्रिय तथा आलसी ना बने ।आवश्यकता से अधिक भोजन करने से व्यक्ति आवश्यकता से अधिक सोता होता है

यह मनुष्य जीवन तपस्या के लिए बना है औरतपस्या का अर्थ है कामवासना पर नियंत्रण, भजन संयम इत्यादि ।इस प्रकार आध्यात्मिक कार्यों के लिए समय बचाना और मनुष्य स्वयंको बाहरी और आंतरिक रूप से शुद्ध कर सकता है ।इस प्रकार शरीर तथा मन दोनों शुद्ध हो जाते हैं।

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श्रीमद् भागवत श्रवण के लिए एकादशी एक अच्छा दिन

यदि कोई व्यक्ति Ekadashi या द्वादशी के दिन श्रीमद् भागवत का श्रवण करता है तो यह निश्चित ही दीर्घायु प्राप्त करता है और जो अत्यंत सावधानी पूर्वक एकाग्रता से इसका पाठ करता हुआ उपवास करता है वह समस्त पाप करने के फलों से मुक्त हो जाता है ( श्रीमद्भागवत से )

Ekadashi व्रत के नाम

1 वर्ष में 12 महीने होते हैं और 12 महीनों में 24 Ekadashi व्रत औरतें आदेशों के पक्ष में और आधे कृष्ण पक्ष में आते हैं प्रत्येक 32 महीनेके पश्चात एक लीप वर्ष आता है जिसमें 4 वर्ष 1 वर्ष की घटनाओं को समन्वित करने के बाद एक अधिक मास जोड़ा जाता हैजिसे अधिक मास कहा जाता है इस अतिरिक्त मास को अधिक मास कहते हैं और इसमें दो और Ekadashi व्रत आते हैं इस प्रकार कुल 26 Ekadashi व्रत होते हैं उनके नाम इस प्रकार

  1. उत्पन्ना एकादशी
  2. मोक्षदा बैकुंठ एकादश
  3. सफला एकादशी
  4. पुत्रदा एकादशी
  5. षटतिला एकादशी
  6. जया भैमी एकादशी
  7. विजय एकादशी
  8. आमलकी एकादशी
  9. पापमोचिनी या पापहारिणी एकादशी
  10. कामदा एकादशी
  11. वरूथिनी एकादशी
  12. मोहिनी एकादशी
  13. अपरा एकादशी
  14. पाण्डव या निर्जला एकादशी
  15. योगिनी एकादशी
  16. देवशयनी एकादशी
  17. कामिका एकादशी
  18. पवित्रोपना एकादशी
  19. अन्नदा एकादशी
  20. पाश्र्वा एकादशी
  21. इन्दिरा एकादशी
  22. पापांकुशा या पाशांकुशा एकादशी
  23. रमा एकादशी
  24. देवोत्थाना एकादशी
  25. अधिक मास पद्दिनी एकादशी
  26. अधिक मास परमा एकादशी

श्री सूत गोस्वामी ने कहा

‘विद्वान ब्राह्मण अत्यंत प्राचीन काल में परम भगवान श्री कृष्ण ने Ekadashi के शुभ महत्व और व्रत के पवित्र दिन और पवित्र दिन में व्रत करने के लिए अनिवार्य विधि  का वर्णन किया था, यदि कोई व्यक्ति भगवान श्री कृष्ण द्वारा वर्णित Ekadashi के व्रत को विधि  के साथ करता है.

एकादशी की कथा को श्रद्धा भक्ति भाव से श्रवण करता है या उनका पालन करता है तो वह इस जीवन में भी आनंद प्राप्त करता है और अगले जीवन में भगवत धाम वापस लौट जाता हैजो व्यक्ति Ekadashi के व्रत को पालन करने में असमर्थ है वह एकादशी के फल उसके कथा के श्रवण और  गुणगान द्वारा प्राप्त कर सकते हैं’

निष्कर्ष

इस पास्ट में हमने आपको Ekadashi व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कि है ,यह पोस्ट में दी गई सभी जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा के सकते है।

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