देश में जल्द लागू हो सकता है One nation one Election! जाने पूरी खबर

One nation one Election की मांग देश में समयसमय पर होती रही है ,इसके पक्ष में मोदी सरकार हमेशा से ही रही है।इसी बीच यह खबर सामने आई है कि केंद्र की मोदी सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन One nation one Election की दिशा में एक अहम कदम बढ़ा दिया है,जिसके लिए पूर्वराष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में उन्होंने एक कमेटी बनाई है।

आपको इस ब्लॉक में हम बताने वाले हैं कि वन नेशन वन इलेक्शन One nation one Election क्या है? और इसके क्याक्या लाभ देश को होने वाले हैं साथ ही वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़ी सारी जानकारी आपको इस पोस्ट में मिलेगी।

One nation one Election बहस की वजह मोदी सरकार द्वारा बुलाया गया संसद का विशेष सत्र है और माना जा रहा है कि इस सत्र में मोदी सरकार एक देश एक चुनाव से संबंधित कोई बिल ला सकता है।

केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में वन नेशन वन इलेक्शन पर एक कमेटी गठित की है, कौनकौन सदस्य है इस कमेटी में है अभी इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है. को बता दें कि सरकार द्वारा 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र सत्र बुलाया गया है, जिसके एक दिन बाद सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन One nation one Election के लिए कमेटी का गठन किया है इस कमेटी काएजेंडा अभी गुप्त रखा गया है.

प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा और राज्य विधानसभा Election को एक साथ करने की वकालत हमेशा से करते आए हैं ,इस पर विचार करने केलिए रामनाथ कोविंद को जिम्मेदारी सौंप गई है . आपको बता दें कि नवंबर दिसंबर में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके बाद अगले साल में जून में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

One nation one Election क्या है?

एक देश एक चुनाव One nation one Election का मतलब आप इसके नाम से ही जान सकते हैं, One nation one Election के अंतर्गत देश में केवल एक ही चुनाव होना चाहिए. इसका मतलब यह है कि पूरे देश में लोकसभा और राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ हो दोनों Election के लिए वोटिंग एक साथ कराई जाए।

One nation one Election को लेकर केंद्रीय मंत्री ने दी प्रतिक्रिया

एक राष्ट्र एक चुनाव One nation one Election पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा अभी एक समिति का गठन किया गया है समिति की एकरिपोर्ट आएगी जिस पर चर्चा होगी सांसद परिवर्तन है और वहां चर्चा होगी इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है भारत को लोकतंत्र कीजननी कहा जाता है यहां विकास हुआ है मैं संसद के विशेष सत्र के एजेंट पर चर्चा करूंगा.

One nation one Election से क्याक्या लाभ ?

जब एक देश एक चुनाव One nation one Election की बात आती है तब इसके पक्ष के लोगों का सबसे बड़ा तर्क यही होता है कि एक देश एक चुनाव से देश का पैसा बचेगा और लाखों करोड़ों रुपए की बर्बादी पर रोक लगाया जा सकता है ,देश में हर साल कहीं ना कहीं पर चुनाव होते रहते हैंजिससे वहां पर लाखों रुपए का खर्चा होता है इस खर्च को एक देश एक चुनाव बिल के माध्यम से बचाया जा सकता है।

देश का पैसा बर्बाद होने से बचाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौके पर One nation one Election की तरफदारी कर चुके हैं इसके पक्ष में हमेशा कहा जाता है कि One nation one Election बिल लागू होने से देश में हर साल होने वाले Election पर खर्च होने वाली करोड़ों की धनराशि को बचाया जा सकता है. बता दें कि 1951 और 1952 लोकसभा चुनाव में 11 करोड रुपए खर्च हुए थे जबकि 2019 लोकसभा चुनाव में 60000 करोड रुपए खर्च हुई थी। One nation one Election से देश के संसाधन बचेंगे और विकास की गति धीमी नहीं पड़ेगी और देश के पैसा बर्बादहोने से बचेगा.

बारबार होने वाले Election से छुटकारा

एक देश एक चुनाव के समर्थन के पीछे एक यह भी तर्क दिया जाता है कि भारत एक विशाल देश है और यहां हर साल कहीं ना कहीं Election होते रहते हैं, चुनाव के आयोजनों में कई स्टेट मशीनरी और संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जब एक देश एक चुनाव बिल लागू होगा तो देश में बारबार चुनाव कराने की तैयारी से छुटकारा मिल जाएगा।पूरे देश में Election के लिए एक ही वोटर लिस्ट होगी,जिससे सरकार के विकास कार्य में रुकावट नहीं आएगी।

One nation one Election के नुकसान

One nation one Election फायदे के लिए पक्ष द्वारा कई मजबूत तर्क दिए जा रहे हैं, लेकिन इसका विरोध भी हो रहा है, कहां जा रहा है कि अगर एक देश एक चुनाव बिल लागू होता है ,तो इससे केंद्र में बैठी पार्टी का ही एक तरफ लाभ होगा अगर देश में सत्ता में बैठी किसी पार्टी का सकारात्मक माहौल बना हुआ है, तो इसे पूरे देश में एक ही पार्टी का शासन हो जाएगा जो कि देश के लिए बहुत खतरनाक और नुकसानदायक हो सकता है।

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One nation one Election एक देश एक चुनाव के खिलाफ यह तर्क भी दिया जा रहा है कि इससे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के बीच मतभेद बढ़ जाएगा, कहां जा रहा है कि इस बिल के लागू होने से राष्ट्रीय पार्टियों को बहुत बड़ा फायदा पहुंचेगा जबकि छोटे दलों को इस बिल से नुकसान होने कीसंभावना है.

चुनावी नतीजे आने में होगी देरी

पूरे देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराए जाते हैं तो इससे यह संभावना पैदा होती है कि चुनावी नतीजे में देरी सकती है ,चुनावी नतीजे में देरी से देश में राजनीतिक परिस्थितता बढ़ेगी जिसकाखामियाजा देश की आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

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